August 06, 2011

यादों की थकान


मैं यादों के पन्ने पलट रही थी
हर पन्ने पर एक अलग कहानी
ना जाने कहाँ से पलकों पे
एक कतरा आंसू आ बैठा
तब ये एहसास हुआ
यादें मेरा दम घोंट रही थीं
और अँधेरा छाया था
उसी पल यादों की किताब बंद कर दी
हाँ
पर यादों की थकान
अभी उतरी नहीं

12 comments:

  1. थोडा वक़्त लगाएगी ये थकन ....यादें हैं ना.....

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  2. तब ये एहसास हुआ
    यादें मेरा दम घोंट रही थीं
    और अँधेरा छाया था

    सटीक लिखा है ..अच्छी अभिव्यक्ति

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  3. wo barish ki bunde aur teri yaad ka aana, dono me koi rista sahai shayed............
    ye aisi hi hoti hai .........hum kitna bhi kosis karein pr ye yaadien nahi jati.............

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  4. अगर आपको प्रेमचन्द की कहानिया पसंद हैं तो आपका मेरे ब्लॉग पर स्वागत है |
    http://premchand-sahitya.blogspot.com/

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  5. झाकता हूँ जब अतीत के आइने मेँ, तो सोचता हूँ कि, वक्त बदल गया , या फिर वक्त ने मुझे बदल दिया। पहले ये जिन्दगी दावोँ पर चलती थी, अब उसके दावेदार हैँ कई। इससे तो भली वहीँ जिँदगी थी, जब चार आने के बाइस्कोप मेँ ज्यादा संतुष्टि मिलती थी। अब समझौता कर लिया मैँने, कि वो यादेँ दूर किसी शहर मेँ बसतीँ हैँ, और वक्त का गुजरना तो एक नियति है। - सुमित श्रीवास्तव

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  6. झाकता हूँ जब अतीत के आइने मेँ, तो सोचता हूँ कि, वक्त बदल गया , या फिर वक्त ने मुझे बदल दिया। पहले ये जिन्दगी दावोँ पर चलती थी, अब उसके दावेदार हैँ कई। इससे तो भली वहीँ जिँदगी थी, जब चार आने के बाइस्कोप मेँ ज्यादा संतुष्टि मिलती थी। अब समझौता कर लिया मैँने, कि वो यादेँ दूर किसी शहर मेँ बसतीँ हैँ, और वक्त का गुजरना तो एक नियति है। - सुमित श्रीवास्तव

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  7. bahut khoobsurat kavita...badhaai.

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  8. यादों का वजन ही इतना है कि थकान नहीं जाती ....

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  9. सुंदर स्वरुप ...शब्दों को खूब संवारा है आपने ......अच्छी कविता के रूप में इसे बंधा है......दाद कबूल कीजियेगा |

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आपके अनमोल वक़्त के लिए धन्यवाद्
आशा है की आप यूँ ही आपना कीमती वक़्त देते रहेंगे