
वो शहर छोड़ना था मुझको
तो बाक्स में बंद कर लाये
किताबें, कपडे, बाकि सब सामान
यहाँ आ के देख तो महसूस हुआ
यादों का सूटकेस वहीँ छुट गया
- शेफाली
शब्दों से खेलना बचपन में सीखाया जाता है मैंने भी सीखा, पहले अक्षरों से शब्द बनाना, फिर शब्दों से वाक्य बनाना, पर एक चीज़ जो और सीखी वो था शब्दों को एक सार में पिरोना, मैंने तो कुछ खास नहीं किया पर लोग कहते हैं की मेरे द्वारा पिरोये गए शब्द कविताओं की श्रंखला बन जाते हैं और आज मेरे इन्ही शब्दों से मेरी पहचान है
