
एक सुन्दर चिकनी माटी सा रिश्ता
विश्वास के चकले पर जब सजाया जाता है
पल पल कुम्हार संस्कार के पानी संग
उसे एक सचल आकार देता है
कुछ रिश्ते टूटते भी हैं
कुछ यूँ ही चटक जाते हैं
कुछ अकार ही नहीं ले पाते
और माटी में ही विलीन हो जाते हैं,
बस कुछ ही विरले होते हैं
जो वक़्त की आग में पकते हैं
मज़बूत हो जाते हैं
और आने वाले हर पल को
सुवासित करते हैं
- शेफाली











